Saturday, September 28, 2019

हायकू रचना

(हायकू)
     मैत्री

    रेशीमगाठ
    ऋणानुबंध साथ
    अडचणीत
   
    विश्वस्थतता
    श्रीकृष्ण सुदाम्याची
    आपुलकीची

   पर्यावरण
   निसर्गाशी सौहार्द
   जीवन  सार्थ
   
   पारदर्शक
   रुसव्या फुगव्यात
   स्नेहबंधात
  
  मैत्रीचा गंध
  परिमल जीवनीं
  आनंद मनी

सौ.ऋतुजा रविंद्र गवस
  नवी मुंबई

कविता

माझी आजी

माझी आजी कुटूंबाचा आधारवड
तिच्या छत्रछायेत सर्व विसावती
झाली शरीराने वृद्ध तरी
स्वभावी करारीपणा मजबूत
तिच्या बटव्यातून निघे
अनेक आजारांवर औषध
संस्काराची शिदोरी आजी
कुटुंबाच्या गोतावळ्यात रमते
नातवंडे मोबाईलमध्ये रमता
हक्काने दटावते-रागे भरते
लगेच  छानशी गोष्टही सांगते
आता थकली आजी पण
साडीच्या ओच्यातून आजही
दहा रुपये खास देते अन
नातवंडाना असमान ठेंगणे
मुंबईत परतताना पापे घेते
डोळे सर्वांचे पाण्याने भरती
सुटीची वाट पाहते टक लावून
गोकुळ पुन्हा एकदा बहरेल
आजी माझी खरं तर सोनपरी
अडचणीवर लगेच उपाय
अनुभवाचे पावसाळे तिच्याठायी तरि
कालानुरूप आमच्यात रमे
माझी आजी आधारवड....

Thursday, September 12, 2019

हायकू रचना

(हायकू)
     मैत्री

    रेशीमगाठ
    ऋणानुबंध साथ
    अडचणीत
   
    विश्वस्थतता
    श्रीकृष्ण सुदाम्याची
    आपुलकीची

   पर्यावरण
   निसर्गाशी सौहार्द
   जीवन  सार्थ
   
   पारदर्शक
   रुसव्या फुगव्यात
   स्नेहबंधात
  
  मैत्रीचा गंध
  परिमल जीवनीं
  आनंद मनी

सौ.ऋतुजा रविंद्र गवस
  नवी मुंबई

हायकू रचना

(हायकू)
     मैत्री

    रेशीमगाठ
    ऋणानुबंध साथ
    अडचणीत
   
    विश्वस्थतता
    श्रीकृष्ण सुदाम्याची
    आपुलकीची

   पर्यावरण
   निसर्गाशी सौहार्द
   जीवन  सार्थ
   
   पारदर्शक
   रुसव्या फुगव्यात
   स्नेहबंधात
  
  मैत्रीचा गंध
  परिमल जीवनीं
  आनंद मनी

सौ.ऋतुजा रविंद्र गवस
  नवी मुंबई

हायकू रचना

(हायकू)
     मैत्री

    रेशीमगाठ
    ऋणानुबंध साथ
    अडचणीत
   
    विश्वस्थतता
    श्रीकृष्ण सुदाम्याची
    आपुलकीची

   पर्यावरण
   निसर्गाशी सौहार्द
   जीवन  सार्थ
   
   पारदर्शक
   रुसव्या फुगव्यात
   स्नेहबंधात
  
  मैत्रीचा गंध
  परिमल जीवनीं
  आनंद मनी

सौ.ऋतुजा रविंद्र गवस
  नवी मुंबई